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न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश...

Aug 6
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों (ट्रायल कोर्ट) के न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर एक अहम निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे ट्रायल कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 साल करने पर आगामी 2 सितंबर तक अपना फैसला लें। इस दौरान कोर्ट ने राज्यों की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें वित्तीय बोझ बढ़ने और अन्य सरकारी कर्मचारियों के साथ भेदभाव होने का हवाला दिया गया था।


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ राज्य सरकारों ने तर्क दिया था कि अगर जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जाती है, तो इससे सरकारी कर्मचारियों के बीच असंतोष फैलेगा। वे भी अपने लिए समान फायदों की मांग करेंगे, जिससे सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। गौरतलब है कि कुछ राज्यों ने पहले ही न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 61 साल कर दी है, जो उनके सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ के समान ही है।


जानकारी के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने राज्यों की इन दोनों आपत्तियों को खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि जब कोई न्यायिक अधिकारी रिटायर होता है, तो सरकार उसे एकमुश्त रकम और पेंशन देती है जो उसकी अंतिम सैलरी के आधे से ज्यादा होती है। इसके साथ ही रिक्त पद पर नई नियुक्ति होने पर नए जज को भी वेतन देना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि इसके उलट, अनुभवी और परिपक्व जजों को सेवा में बनाए रखना राज्य और न्यायपालिका दोनों के लिए आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।


सरकारी कर्मचारियों के साथ समानता की दलील को ठुकराते हुए बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति एक संवैधानिक व्यवस्था के तहत होती है, इसलिए वे सरकारी कर्मचारियों से एक अलग वर्ग हैं। बेंच ने राज्यों के महाधिवक्ताओं (एडवोकेट जनरल) से अपनी-अपनी सरकारों को यह समझाने को कहा कि वे सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा रिटायरमेंट उम्र की परवाह किए बिना जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने पर पुनर्विचार करें।

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