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IGKV में हॉस्टल संकट, 600 छात्रों को परिसर से बाहर रहने की मजबूरी...

35 minutes ago
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायपुर :- राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवासीय सुविधाओं को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। एक ओर विश्वविद्यालय परिसर के पुराने हॉस्टल जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं, जहां प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं हो रही हैं। वहीं दूसरी ओर हॉस्टल की सीमित क्षमता के कारण करीब 30 प्रतिशत छात्रों को परिसर से बाहर रहना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में बने कई हॉस्टल 30 से 60 साल पुराने हो चुके हैं। लंबे समय से रखरखाव की कमी के कारण भवनों की स्थिति खराब होती जा रही है। छात्रों का कहना है कि जर्जर भवनों में रहना उनकी मजबूरी बन गया है और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

















जानकारी के अनुसार, दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टल में प्लास्टर और छज्जे गिरने की घटनाएं सामने आई थीं। इनमें एक छात्र घायल भी हुआ था। साल 1960 में बने सत्यम हॉस्टल सहित कई अन्य भवन अब काफी पुराने हो चुके हैं और उनकी मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हॉस्टलों की जांच कराई थी और मरम्मत कराने का दावा किया गया था, लेकिन छात्रों के अनुसार हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। पिछले महीने परीक्षाओं के बाद छात्रों की छुट्टियां भी थीं, जिसे मरम्मत कार्य पूरा करने के लिए बेहतर समय माना जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हो सका।


विश्वविद्यालय में भवनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए पहले से व्यवस्था मौजूद है। नियमित अमले के तौर पर दो इंजीनियर, दो लिपिक और एक केयरटेकर तैनात हैं। जरूरत के अनुसार छोटे और मध्यम स्तर के मरम्मत कार्यों के लिए 50 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था भी है। इन कार्यों के लिए वित्तीय मंजूरी स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दी जाती है। इसके बावजूद समय पर मरम्मत नहीं होने से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।


IGKV में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या और हॉस्टल क्षमता के बीच बड़ा अंतर है। कृषि महाविद्यालय में यूजी की करीब 600, पीजी की 800 और पीएचडी की लगभग 600 सीटें हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 2 हजार विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक व्यवस्था है। वहीं परिसर में रहने के लिए कुल 14 हॉस्टल उपलब्ध हैं। इनमें छह बालिका हॉस्टल में लगभग 650 सीटें और आठ बालक हॉस्टल में करीब 750 सीटें हैं। दोनों को मिलाकर कुल 1400 विद्यार्थियों के रहने की ही सुविधा उपलब्ध है। इस हिसाब से करीब 600 विद्यार्थी यानी लगभग 30 प्रतिशत छात्र हॉस्टल सुविधा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे छात्रों को मजबूरी में शहर में किराए के कमरे या पीजी में रहना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।


छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जर्जर हॉस्टलों की मरम्मत जल्द कराई जाए और हॉस्टल क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि सुरक्षित आवास छात्रों की मूलभूत जरूरत है और इसमें लापरवाही नहीं होनी चाहिए। वहीं IGKV के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी हॉस्टलों की जांच कराई जा चुकी है। जिन हॉस्टलों में शिकायतें मिली हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।

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