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प्याज के दाम में राहत की उम्मीद: नई फसल की आवक बढ़ी...

54 minutes ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली :- महंगे प्याज से परेशान लोगों को आने वाले हफ्तों में राहत मिल सकती है। खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने और पुराने स्टॉक की उपलब्धता से बाजार में प्याज की सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने भी कीमतों पर लगाम लगाने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री बढ़ा दी है। हालांकि, फिलहाल खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें पिछले साल के मुकाबले करीब दोगुनी बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 अक्टूबर को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 52.99 रुपये प्रति किलो रही। एक साल पहले इसी अवधि में यह कीमत 26.65 रुपये प्रति किलो थी।


सालाना आधार पर प्याज की औसत खुदरा दाम में करीब 99 प्रतिशत यानी करीब दोगुने की बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्याज की औसत खुदरा कीमत 10 सितंबर के आसपास 53.10 रुपये प्रति किलो थी, जो 10 अक्टूबर को मामूली घटकर 52.99 रुपये प्रति किलो रह गई। इससे साफ है कि थोक बाजार में सप्लाई में सुधार के संकेत मिलने के बावजूद खुदरा बाजार में इसका लाभ अभी उपभोक्ताओं तक सीमित रूप में ही पहुंचा है। थोक बाजार में प्याज की औसत कीमत 4,591 रुपये प्रति क्विंटल रही। यह एक महीने पहले की तुलना में 2.4 प्रतिशत और एक साल पहले के मुकाबले 123.3 प्रतिशत अधिक है।


प्याज की कीमतों में संभावित राहत की प्रमुख वजह महाराष्ट्र और दूसरे उत्पादक राज्यों से नई फसल की आवक बढ़ना है। कारोबारियों को उम्मीद है कि नवंबर तक बाजार में प्याज की उपलब्धता बेहतर होगी। कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से सप्लाई नवंबर के अंत तक जारी रहने की उम्मीद है। महाराष्ट्र की शुरुआती खरीफ फसल की आवक अक्टूबर के अंत तक थोड़ी मात्रा में शुरू हो सकती है। इसके बाद आवक बढ़ने से बाजार में उपलब्धता को सहारा मिलने की संभावना है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में पुराने प्याज का पर्याप्त स्टॉक होने की बात भी सामने आई है।


इससे नवंबर के तीसरे सप्ताह तक मांग पूरी करने में मदद मिल सकती है। वहीं, राजस्थान के अलवर क्षेत्र से प्याज की आपूर्ति बढ़ने पर उत्तर भारत की महाराष्ट्र पर निर्भरता भी कम हो सकती है। सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज को बाजार में उतारने के लिए परिवहन और वितरण व्यवस्था भी मजबूत की है। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में तेज उछाल को रोकना है। हालांकि, सरकारी स्टॉक से प्याज उपलब्ध कराने के बावजूद खुदरा कीमतों में अब तक बड़ी गिरावट नहीं आई है।


इसकी एक वजह यह भी है कि थोक बाजार में कीमतों में बदलाव का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में समय लग सकता है। आने वाले हफ्तों में प्याज की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से नई फसल की आवक, पुराने स्टॉक की उपलब्धता और सरकारी बिक्री के असर पर निर्भर करेगी। यदि महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से सप्लाई उम्मीद के मुताबिक बढ़ती है, तो अक्टूबर के अंत से नवंबर के दौरान कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

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