महानदी जल विवाद के स्थायी समाधान की उम्मीद, अमित शाह की अध्यक्षता में ओडिशा-छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की अहम बैठक...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली: सालों से चले आ रहे महानदी जल विवाद का अब जल्द ही अंत होने के आसार नजर आ रहे हैं। इस जटिल मुद्दे पर निर्णायक चर्चा के लिए आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक हो रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस वार्ता के बाद नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच ठोस सहमति बन जाएगी।
इस बैठक से ठीक पहले 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भुवनेश्वर जाकर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। इस दौरान साय ने स्पष्ट कर दिया था कि महानदी के जल को लेकर दोनों राज्यों के बीच कोई बड़ी खींचतान नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भी भाजपा सत्ता में है, इसलिए लंबे समय से अटके इस अंतरराज्यीय विवाद को आपसी बातचीत से बहुत जल्द सुलझा लिया जाएगा।
इससे पहले नई दिल्ली में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच वार्ता हो चुकी है। उस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी सहमति के आधार पर केंद्रीय जल आयोग (CWC) के जरिए इस समस्या का समाधान निकालने पर अपनी रजामंदी दी थी।
क्या है महानदी विवाद की असल वजह ?
महानदी को ओडिशा की 'जीवन रेखा' माना जाता है। पानी के बंटवारे को लेकर यह पूरा विवाद साल 2016 में शुरू हुआ था। ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ द्वारा महानदी के ऊपरी हिस्से में एकतरफा तरीके से आठ बैराज बना दिए गए हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में पानी का बहाव काफी कम हो गया है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर ओडिशा की कृषि, मछली पालन और पनबिजली परियोजनाओं पर पड़ रहा है।
हालांकि, मौजूदा समय में दोनों राज्यों के रिश्ते काफी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालिया मुलाकात को लेकर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर खुशी जाहिर की थी। उन्होंने बताया था कि दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने और जनता के कल्याण को लेकर उनके और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बीच बेहद सार्थक चर्चा हुई है।






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