सरकारी विभागों पर 3432 करोड़ का बिजली बिल बकाया, फिर गरीबों से सख्ती क्यों? कांग्रेस ने दागे सवाल...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की वसूली को लेकर कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब सरकारी विभागों पर ही हजारों करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है, तो फिर आम जनता और गरीबों से वसूली में इतनी सख्ती क्यों की जा रही है?
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि एक तरफ सरकारी विभागों का बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवारों पर बिल भरने का भारी दबाव बनाया जा रहा है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक सरकारी विभागों पर लगभग 2,883.42 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया था। जून 2026 तक की अनुमानित मांग को जोड़ने पर यह राशि 3,432.64 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। वर्तमान में प्रदेश में 1.65 लाख से अधिक सरकारी बिजली कनेक्शन हैं।
दोहरा मापदंड: गरीबों का कटता है कनेक्शन, विभागों को छूट क्यों ?
वंदना राजपूत ने सवाल उठाया कि जब सरकार के अपने ही विभाग हजारों करोड़ रुपये के बकायेदार हैं, तब आम जनता पर वसूली का दबाव क्यों? वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकारी विभागों ने लगभग 1,252 करोड़ रुपये की बिजली खपत की, लेकिन भुगतान सिर्फ 814 करोड़ रुपये का ही हुआ, यानी 438 करोड़ रुपये अब भी बकाया रह गए।
उन्होंने इसे सरकार की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था का 'दोहरा मापदंड' करार देते हुए पूछा कि, जिस गरीब परिवार का कुछ हजार रुपये बकाया होने पर तुरंत कनेक्शन काट दिया जाता है, उसके मुकाबले करोड़ों दबाकर बैठे सरकारी विभागों पर इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखाई जाती?
आम उपभोक्ताओं को भी मिले किश्तों की सुविधा -
कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट पूछा है कि क्या सरकारी विभागों और आम जनता के लिए नियम अलग-अलग हैं? सरकार ने विभागों के पुराने बकाये को चुकाने के लिए चार आसान किस्तों (जुलाई 2026 से जून 2027 तक) की व्यवस्था की है। कांग्रेस ने मांग की है कि किस्तों की यही सुविधा आम उपभोक्ताओं को भी दी जानी चाहिए। सरकार आम जनता पर आर्थिक दबाव डालना बंद करे और पहले अपने विभागों से बकाये की वसूली करे।






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