पीएससी गड़बड़ी से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने रद्द की जीएसटी पदोन्नति, कांग्रेस ने बताया 'डैमेज कंट्रोल'....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में लोक सेवा आयोग (पीएससी) और जीएसटी पदोन्नति मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए जीएसटी विभाग में 42 कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द करने की कार्रवाई को पीएससी घोटाले का 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया है।
जीएसटी पदोन्नति रद्द करने पर उठाए सवाल
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि पीएससी परीक्षा की गड़बड़ियां उजागर होने के बाद सरकार ने खुद को बचाने के लिए आनन-फानन में जीएसटी परीक्षा की जांच रिपोर्ट पर यह कार्रवाई की है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि पदोन्नति में गड़बड़ी थी, तो सरकार ढाई साल तक क्या कर रही थी? महज 42 कर्मचारियों के इस मामले का निराकरण दो-तीन महीने में किया जा सकता था। कांग्रेस ने मांग की है कि जांच समिति की रिपोर्ट और सरकार के पास मौजूद साक्ष्यों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए याद दिलाया कि 2024 में 216 पदों पर पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा में भी इसी सरकार के कार्यकाल में गड़बड़ी हुई थी, जिसे विपक्ष के भारी दबाव के बाद रद्द करना पड़ा था।
पीएससी 2025: सिर्फ साक्षात्कार स्थगित करना काफी नहीं, कापियां सार्वजनिक हों
पीएससी 2025 के साक्षात्कार स्थगित करने के सरकार के फैसले को कांग्रेस ने अपर्याप्त बताया है। पार्टी की मांग है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं (कापियां) अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे अपने नंबरों का स्वमूल्यांकन कर सकें।
सुशील आनंद शुक्ला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 265 पदों के विरुद्ध 1:3 के नियम के तहत 795 अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के लिए होना था, लेकिन आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही योग्य माना है। आयोग का तर्क है कि बचे हुए 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक नहीं ला सके। कांग्रेस ने इस तर्क पर संदेह जताते हुए कहा है कि 2024 की परीक्षा के मूल्यांकन में भी बड़े पैमाने पर गलत नंबर देने की गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसलिए, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों को उनकी कापियां दिखाई जानी चाहिए।





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