रीवा में ही मुख्यमंत्री से लेकर टाप भाजपा की नजर, इतनी घेराबंदी करने की स्थिति क्यों पनपी.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में विंध्य प्रदेश कुछ अलग ही महत्व रखता है, जहां की जनता बड़े-से-बड़े धुरंधरों को धराशाई करने में देर नहीं लगाते। देश में पहला बसपा सांसद रीवा ने दिया तो फिर एक साधारण नेत्रहीन यमुना प्रसाद शास्त्री को सांसद बना कर दिल्ली भेजा था और रीवा के महाराजा मार्तण्ड सिंह को पराजित कर दिया था, पंडित श्री निवास तिवारी राजनीति के पुरोधा को राजकुमार उर्मलिया ने पटकनी दी तो फिर राजनीति में खड़े नहीं हो सके थे।
2018 में रीवा ने भाजपा को पूरे आठ विधायक दिया परन्तु 2023,, में रीवा परिवर्तन की ओर मौन व्रत धारण कर लिया है, बोलेगा कुछ नहीं परन्तु पटकनी ऐसी देंगे की परिणाम का अंदाजा नही लगा सकते, कौन जीतेगा कौन हारेगा यह अभी मत पूछो, लेकिन केन्द्रीय गृह मंत्री से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित प्रधानमंत्री तीन महीने से लगातार रीवा सतना सीधी, शहडोल, सिंगरौली में ही सबसे अधिक दंड बैठक लगा रहे हैं, रीवा में जिस तरह की घेराबंदी करने की तमाम बड़ी कोशिश हो रही है उससे जनता में सीधे मैसेज जा रहा है कि भाजपा का रीवा में चार मे मामला साफ़ हो जायेगा, कांग्रेस पार्टी से रीवा प्रत्याशी को जनता देखने को तरसती है, मिलना बात करना तो सातवें आसमान की कहानी है,न कोई पसंद करते हैं परन्तु जनता अपने अपमान एवं कुछ स्थाई परिस्थितियों को देखते हुए इतना कठोर निर्णय लेने की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हो रही है की उसके चलते कुछ कहना मुश्किल हो रहा है,,,,,?
चुनाव के समय वोटिंग का निर्धारण समाज में व्यक्ति से नहीं रीवा में वर्ग जाति सम्प्रदाय से किया जाता है तथा यहां यह देखा जाता है कि कौन सा वर्ग कितना प्रभावी है और कौन सा वर्ग प्रभावित है, कौन सा वर्ग तिरस्कृत है,,, तो वर्तमान समय में सबसे ज्यादा ब्राह्मण समाज एवं वैश्य समाज अपने आप को तिरस्कृत एवं मुख्य धारा से अलग खड़ा महसूस कर रहा है,जो मौन कहानी लिखने कि कोशिश में चल पड़ा है,,
रीवा के बेरोजगार युवा दिशा हीन गांवों में पैकारी कर जीवन यापन कर रहे हैं, पुलिस उन्हें अपराधी बना रही है, कानून व्यवस्था ध्वस्त,, घूंस खोरी भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है,, सरकार वोट के लिए लाडली बहना पर आश्रित हो गई है,पर समाज को तोड़ने वाली व्यवस्था पर काबू नहीं है, विकास की परिभाषा में निजी लाभ की चल रही रेल किस पटरी पर जाती है देखते रहिए,,
कहते हैं कि रीवा के अपमानित ब्राह्मण दिशाहीन नही हैं दिशा बदलने का महारत रखते हैं,,,?






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