पत्रकारों की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सर्वोपरि: नेशनल मीडिया प्रेस क्लब की दो टूक....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली: हाल ही में राजधानी दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान ग्राउंड कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को हिरासत में लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद 'नेशनल मीडिया प्रेस क्लब' ने एक सख्त और स्पष्ट संदेश जारी किया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि राजनीतिक मतभेदों के चलते पत्रकारों को निशाना बनाना और मीडिया को राजनीतिक अखाड़ा बनाना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है।
प्रेस क्लब की 6 प्रमुख मांगें और अपील:
प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान:
संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मीडिया को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिली हुई है। पेशेवर दायित्व निभा रहे किसी भी पत्रकार को बिना ठोस कारण के प्रताड़ित या बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिसिया कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा:
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का अधिकार है, लेकिन किसी भी मीडियाकर्मी को हिरासत में लेने से पहले उसके वैधानिक आधार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हर कार्रवाई को न तो स्वतः सही ठहराया जा सकता है और न ही बिना साक्ष्यों के गलत।
राजनीतिक ठप्पे लगाने की संस्कृति पर रोक:
किसी खबर से असहमति होने पर पत्रकारों को “गोदी मीडिया”, “पप्पू मीडिया” या किसी दल विशेष का समर्थक कहकर उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाना गलत है। पत्रकार की पहचान उसके तथ्यों और निष्पक्षता से होनी चाहिए।
सवाल पूछना पत्रकार का मूल अधिकार:
चाहे प्रशासन हो या कोई राजनीतिक दल, हर मंच से तथ्यपरक सवाल पूछने का अधिकार पत्रकार के पास है। केवल असहमति के आधार पर सवाल पूछने वाले को किसी दल का एजेंट बताकर अपमानित करने से बचा जाना चाहिए।
हिंसा और उपद्रव पर एक समान रुख:
प्रदर्शनों के दौरान यदि पुलिस, महिलाओं, आम नागरिकों या मीडियाकर्मियों पर हमला होता है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो विचारधारा से ऊपर उठकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आपसी सौहार्द और सम्मान:
पत्रकारिता में विचारों का मतभेद आम बात है। एक मीडियाकर्मी दूसरे की खबर की तथ्यात्मक आलोचना तो कर सकता है, लेकिन व्यक्तिगत हमले और निराधार आरोप-प्रत्यारोप लगाने से बचना चाहिए।
संगठन का अंतिम संदेश -
नेशनल मीडिया प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि वह किसी राजनीतिक दल या दबाव समूह के पक्ष में नहीं, बल्कि केवल संविधान, सत्य और पत्रकारों के अधिकारों के साथ खड़ा है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पत्रकारों के साथ हुई अनुचित घटनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा की जाए।
"पत्रकारिता किसी राजनीतिक खेमे की जागीर नहीं, बल्कि जनता तक सच पहुंचाने का पवित्र माध्यम है।"
प्रेषक: राकेश कुमार साहू, संवाददाता - शालिनी न्यूज़ एजेंसी (जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments