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विदेशी एक्सपर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, चीतों को लेकर नहीं मानी राय.....

Aug 5, 2023
2 min read


























चीता प्रोजेक्ट के प्रबंधन पर बेहतर ‎निगरानी नहीं करने का आरोप लगाते हुए ‎विदेशी ‎विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट को ‎चिट्ठी ‎‎लिखी है। गौरतलब है ‎कि भारत में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीते लाए गए थे। इन चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो में रखा गया है। ले‎किन अब तक अनेक चीतों की मौत हो चुकी है। इन चीतों को लेकर दक्षिण अफ्रीकी और नामीबियाई विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में लिखा गया है कि उनकी राय को चीता प्रोजेक्ट के लिए बनी नई संचालन समिति की ओर से नजरअंदाज किया जा रहा है।


चीतों को विंडो ड्रेसिंग तक सीमित कर दिया गया है। विशेषज्ञों ने ये चिट्ठी दक्षिण अफ्रीका के एक नर चीता सूरज के कूनो नेशनल पार्क में मृत पाए जाने के एक दिन बाद 15 जुलाई को लिखी थी। इस पत्र में विदेशी विशेषज्ञों की ओर से पशु चिकित्सा वन्यजीव विशेषज्ञ प्रोफेसर एड्रियन टॉर्डिफ ने साइन भी किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को लिखी चिट्ठी में परियोजना के वर्तमान प्रबंधन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से मई 2023 में परियोजना की समीक्षा और निगरानी के लिए जो समिति गठित की, उसने चीता को लेकर दी गई राय पर ध्यान नहीं दिया।


कुछ महीने पहले तक परियोजना के प्रमुख सदस्य रहे, प्रो. वाई. वी. झाला को पैनल में शामिल नहीं किया गया।विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कुछ चीतों की मौतों को बेहतर निगरानी और समय पर इलाज से रोका जा सकता था। उदाहरण के लिए, एक नर चीते की गर्दन पर घाव थे। उसे अनुकूलन शिविर के अंदर रखा गया था। इस नर चीते की बिगड़ती स्थिति के बावजूद, कुनो के कर्मचारियों ने उसका कोई इलाज नहीं किया और विशेषज्ञों को सूचित भी नहीं किया। विशेषज्ञों ने कहा कि इस चीता की मौत बिना इलाज मिले ही हुई है। शायद यही हाल पहले चीतों की मौत के दौरान भी हुआ है।


विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके बाद एक और नर चीता को मृत पाया गया था। उनके ट्रैकिंग कॉलर में खराबी आ गई थी। इस वजह से उसकी गर्दन पर सूजन थी और घाव में कीड़े पड़ गए थे। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पहले सूचित किया जाता और घावों की तस्वीरें दिखाई जाती, तो वे चीते का उ‎चित इलाज भी कर सकते थे। इधर ग्लोबल टाइगर फोरम के महासचिव और चीता प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेश गोपाल ने विशेषज्ञों के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि यह बात बिल्कुल भी सच नहीं है। समिति में 15 लोग थे। उनकी सिफारिशों को उचित सम्मान दिया गया था, हर बात को महत्व ‎दिया गया था।

 
 
 

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