आई फ्लू का कहर अब ग्रामीण क्षेत्रों में, विभाग ने उठाया बड़ा कदम...

विगत कुछ दिनों से अचानक पूरे अंचल में आई फ्लू के मरीज बढ़ रहे हैं। शहरों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी आई फ्लू (कंजक्टिवाइटिस) के मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। एक से दूसरे में फैलने वाली यह बीमारी पूरे अंचल में अब तक सैकड़ों लोगों को अपनी गिरफ्त में ले क चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन 20- 25 मरीज आई फ्लू के इलाज हेतु आ रहे हैं।
इसके संक्रमण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सजग हो गई है और ग्रामों व स्कूलों में जाकर आवश्यक दवाइयाँ दे रही है तथा उससे बचाव के लिए उपाय बताये जा रहे हैं। आई फ्लू फैलने का सबसे बड़ा कारण संक्रमितों की लापरवाही है। आई फ्लू से संक्रमित होने के बावजूद मरीज हमेशा की तरह दूसरे लोगों से मिल रहे हैं। यहाँ तक कि मरीज के द्वारा इस्तेमाल किए गए कपड़े व पानी का परिवार के सदस्य भी उपयोग कर रहे हैं। सावधानी नहीं बरतने की वजह से आई फ्लू तेजी से फैल रहा है। स्कूली बच्चों में इसकी संख्या अधिक देखी जा रही है। यही कारण है कि सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी तत्काल स्कूलों में पहुँचकर बच्चों की जाँच कर रही है और बच्चों को जरूरी दवाएँ दी जा रही है। वहीं ग्रामों में जाकर भी ग्रामीणों को आई फ्लू से - बचने व सुरक्षा के उपाय बताये जा रहे हैं। इस दौरान सबसे पहले आई फ्लू के मरीजों की पहचान की जा रही है और मरीजों को दवाएं देकर सावधानी बरतने कहा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बरसात के मौसम में यह बीमारी फैलती है। वहीं 3 से 4 दिनों में मरीज ठीक भी हो जाता है। आई फ्लू (कंजक्टिवाइटिस) को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। कई मरीज ऐसे भी हैं जो मेडिकल से ही क्लोरोफेनिकल ट्यूब लेकर घर में ही इसका इलाज कर ले रहे हैं, जबकि कई मरीज निजी चिकित्सक के पास भी पहुंच रहे हैं।
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली के बीएमओ बी बी कोसरिया से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा प्रतिदिन ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जाकर बच्चों की पहचान कर इलाज किया जा रहा है। वहीं जो बच्चे आई फ्लू से ग्रसित हैं, उन्हें अलग रखने तथा जो ज्यादा तकलीफ में हैं, उन्हें आइसोलेट करने के लिए कहा जा रहा है और 3-4 दिन स्कूल आने के लिए मना करने कहा जा रहा है, ताकि दूसरे बच्चे इससे संक्रमित न हो सकें। इसके लक्षण लगभग एक सप्ताह तक रहते हैं। संक्रमित होने पर उन्होंने मॉक्सीफ्लॉक्सेसिन ड्रॉप लगाने और आँखों में चिपड़ा आने पर गुनगुने पानी से आंख को धोने की सलाह दी है।






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