google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

हथियार छोड़ कलम थामने वाले 8 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने पास की 10वीं की परीक्षा...

11 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

Bastar | छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों ने अब शिक्षा के बल पर एक नई और प्रेरणादायक शुरुआत की है। छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के जरिए आयोजित 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 8 आत्मसमर्पित पूर्व नक्सलियों ने शानदार सफलता हासिल की है। इन सफल परीक्षार्थियों में बस्तर जिले से 6, कांकेर से 1 और बीजापुर से 1 शख्स शामिल है। खास बात यह है कि इस सूची में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के पूर्व स्टेट कमेटी मेंबर रहे भास्कर और कभी 'नक्सली डॉक्टर' के नाम से पहचानी जाने वाली महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की गीता नारोटे ने प्रथम श्रेणी (First Division) में परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम की है।


35 साल की उम्र में गीता ने बदली किस्मत -

गढ़चिरौली की रहने वाली गीता नारोटे की जिंदगी कभी संघर्षों और जंगलों के साये में गुजरी थी। पारिवारिक तंगहाली के चलते उन्होंने छठी कक्षा में ही स्कूल छोड़ दिया था और लगभग दो दशक तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहीं। इस दौरान वह घायल साथियों का इलाज करने, टांके लगाने और दवाइयां देने का काम करती थीं, जिसके चलते संगठन में उन्हें 'डॉक्टर गीता' कहा जाता था। सरेंडर के बाद उन्होंने अपनी रुकी हुई जिंदगी को एक नई दिशा देने का फैसला किया। 35 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू की और ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर साबित कर दिया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।


हथियार छोड़कर किताबों से जुड़ रहे हैं भास्कर -

तेलंगाना के मूल निवासी भास्कर कभी नक्सली संगठन में एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा हुआ करते थे। 1990 के दशक में संगठन से जुड़े भास्कर ने धीरे-धीरे कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और वह DKSZC के स्टेट कमेटी सदस्य के पद तक पहुंचे। बस्तर में लंबे वक्त रहने के दौरान हिंदी सीखने के साथ-साथ उनमें साहित्य और किताबों के प्रति गहरी रुचि जाग उठी थी। मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्होंने इसी ललक को अपनी ताकत बनाया। ओपन स्कूल की 10वीं परीक्षा फर्स्ट क्लास से पास करने वाले भास्कर का कहना है कि उन्होंने कभी हाथों में हथियार उठाए थे, लेकिन अब उनका पूरा फोकस ज्ञान और समाज सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने का है।


प्रशासन की पुनर्वास नीति ला रही है रंग -

बस्तर रेंज के आईजी बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उनकी योग्यता, क्षमता और पसंद के अनुसार ढालने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जिन पूर्व नक्सलियों ने शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा जताई, उन्हें ओपन बोर्ड परीक्षा की तैयारी कराई गई थी। संभाग के सभी 8 परीक्षार्थियों का पास होना इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर सकारात्मक बदलाव मुमकिन है।


प्रशासन अब इन सभी सफल युवाओं को उच्च शिक्षा के अवसरों के साथ-साथ उनकी रुचि के अनुसार रोजगार और कौशल विकास (Skill Development) से जोड़ने की पुख्ता तैयारी कर रहा है, ताकि वे समाज में एक सम्मानित और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html