दोगुनी मात्रा में निकाला रॉयल्टी बिना खनन किए हुए...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
खनिज विभाग ने अवैध खनन के कारोबार को सालों से अपने कंधों पर ढोया है। अब भी यह सिलसिला जारी है। लीज स्वीकृत करते समय तो खनिज अधिकारी आंखें और मुंह बंद कर देते हैं। बाद में भी लीजधारक से समझौता करके उनके हिसाब से ही खनिज विभाग चलाया जा रहा है। अब गुड़ेली के छत्तीसगढ़ ट्रेड लिंक क्रशर की बड़ी अनियमितता सामने आ रही है। लीज से बाहर खनन करने के अलावा भूमि का डायवर्सन भी नहीं करवाया है। गौण खनिजों के लीजधारकों ने खनिज विभाग को भी लीज पर ले लिया है। पट्टेदार ही खनिज विभाग के सर्वेसर्वा बने हुए हैं। उन्हीं के इशारे पर रॉयल्टी जारी होती है। खनिज अधिकारी पट्टेदारों के हाथ की कठपुतली बनकर खेल दिखा रहे हैं। खनिपट्टों की वास्तविक स्थिति देखे बगैर ही रॉयल्टी जारी की जा रही है।
यह जानते हुए कि लीज एरिया से बाहर और अधिक गहराई तक खनन किया जा चुका है, खनिज अधिकारी सारी सच्चाई के बदले बड़ी डील कर लेते हैं। लीजधारक भी खनिज विभाग का पेट भरने के बाद अपनी मनमानी करता है। गुड़ेली में एक लाइमस्टोन खनिपट्टा है जो छत्तीसगढ़ ट्रेड लिंक संचालक विवेक अग्रवाल पिता ऋषि अग्रवाल निवासी गांधीगंज को जारी किया गया है। खसरा नंबर 128/1/क रकबा 0.825 हे. में चूना पत्थर खनन की लीज दी गई है। हैरानी की बात यह है कि इस जमीन का डायवर्सन ही नहीं कराया गया लेकिन खनिज विभाग ने बिना दस्तावेज देखे लीज स्वीकृत कर दी। 22 अक्टूबर 2010 से 21 अक्टूबर 2040 तक 30 साल के लिए लीज दी गई है। लीजधारक को लीज वाली जमीन पर ही खनन करना था लेकिन उसने आसपास की जमीन पर भी खनन कर लिया है। खनिज विभाग की करामात देखिए कि 2010 से इसी अवैध खनन से निकले लाइनस्टोन को वैध बनाने का काम कर रही है।






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