दिल्ली: वॉशिंग मशीन के स्पेयर पार्ट्स बेचने के नाम पर 1.5 लाख की ठगी.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली:- साइबर अपराध को रोकने और धोखाधड़ी से हासिल पैसे को बैंक खातों में मंगाने और उनके गलत इस्तेमाल में शामिल नेटवर्क को तोड़ने की लगातार कोशिशों के तहत पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए वॉशिंग मशीन के स्पेयर पार्ट्स बेचने के बहाने की गई धोखाधड़ी के एक मामले को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है।
जांच के दौरान, धोखाधड़ी की रकम को हासिल करने और निकालने के लिए अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने या करवाने में शामिल तीन लोगों को पकड़ा गया। एक फरार साथी की भूमिका भी सामने आई, जिसने कथित तौर पर धोखाधड़ी के पैसे के लेन-देन में तालमेल बिठाया और खाताधारकों को पैसे निकालने और पहुंचाने के बारे में निर्देश दिए।
दरअसल, गुजरात के पाटन के रहने वाले हुसैन चूनावाला से नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के जरिए एक शिकायत मिली। शिकायत के अनुसार, पीड़ित वॉशिंग मशीन के स्पेयर पार्ट्स खरीदना चाहता था और उसने 1,50,000 का ऑनलाइन पेमेंट किया। हालांकि, पेमेंट करने के बाद उसे वादे के मुताबिक स्पेयर पार्ट्स नहीं मिले और संबंधित लोगों से बातचीत भी बंद हो गई। धोखाधड़ी का शक होने पर पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल के जरिए मामले की रिपोर्ट की। जांच के दौरान पता चला कि धोखाधड़ी की रकम का कुछ हिस्सा पूर्वी दिल्ली में मौजूद एक एटीएम से निकाला गया था। इसके आधार पर दिल्ली के पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और मामले के खुलासे के लिए टीम का गठन किया गया।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट होल्डर' या 'कैश हैंडलर' के तौर पर किया जा रहा था, जबकि फरार साथी ठगी की रकम के लेन-देन को संभाल रहा था। विकास सोनी के पास से आईफोन 13 बरामद किया गया, जिसमें लेन-देन और साथियों के साथ बातचीत से जुड़े चैट मौजूद थे। जांच के दौरान, आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक अकाउंट से जुड़ी एक और एनसीआरपी शिकायत भी मिली। फरार साथी का पता लगाने, नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और पैसे के पूरे लेन-देन का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। आरोपियों ने कथित तौर पर वॉशिंग मशीन के स्पेयर पार्ट्स के लिए ऑनलाइन खोज कर रहे संभावित खरीदारों को निशाना बनाया। धोखाधड़ी करने वालों ने संभावित पीड़ितों तक पहुंचने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म और सर्च इंजन का इस्तेमाल किया।
कुछ मामलों में, जब पीड़ित गूगल पर नामी ब्रांड के कस्टमर-केयर या कॉन्टैक्ट नंबर खोज रहे थे, तो कथित तौर पर विक्रेता या सर्विस प्रोवाइडर बनकर लोगों ने उनसे संपर्क किया। पीड़ितों का भरोसा जीतने के बाद, धोखाधड़ी करने वालों ने कथित तौर पर कम कीमत पर स्पेयर पार्ट्स देने का लालच दिया और उनसे ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा। धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के कई 'म्यूल' बैंक अकाउंट में भेजी गई। अकाउंट होल्डर्स को कथित तौर पर पैसे मिले और फरार साथी के कहने पर उन्होंने एटीएम से पैसे निकाले और अपना कमीशन रखने के बाद बाकी कैश उसे सौंप दिया। जांच से पता चलता है कि म्यूल अकाउंट होल्डर्स का इस्तेमाल कथित तौर पर धोखाधड़ी के पैसे को इधर-उधर करने और निकालने के लिए किया जा रहा था, जिससे असली लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल हो गया।







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