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कोर्ट :- नई E20 गाड़ी दो या पूरा पैसा वापस करो.....

Jul 16
6 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ -

कंज्यूमर कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, जब E20 पेट्रोल ही हर जगह मिलेगा तो वाहन मालिक वही अपनी गाड़ी में इस्तेमाल करेगा, आयोग ने कार कंपनी को नई E20 कार देने या फिर पूरा पैसा रिफंड करने का आदेश दिया है |


डा. प्रेमराज डेब्टा पेशे से नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) हैं, पेट्रोल तो वही था, जो पेट्रोल पंप पर मिला, गाड़ी भी वही थी, जिसे कंपनी ने E20 के लिए तैयार बताया था | लेकिन कुछ ही समय बाद इंजन ने जवाब देना शुरू कर दिया | फिर शुरू हुआ सर्विस सेंटर का चक्कर, खर्च और आखिर में कानूनी लड़ाई, अब इस लड़ाई में जो फैसला आया है, उसने सिर्फ एक वाहन मालिक को राहत नहीं दी, बल्कि देश भर में इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल को लेकर छिड़ी बहस को नई दिशा दी है |


दरअसल, रायपुर डिस्ट्रिक कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमिशन ने E20 पेट्रोल से जुड़े मामले में वाहन मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है. आयोग ने माना कि जब पेट्रोल पंपों पर E20 ही आम तौर पर उपलब्ध है, तब उपभोक्ता से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इसका इस्तेमाल न करे. जाहिर है कि जो पेट्रोल मिलेगा, वाहन मालिक उसी का इस्तेमाल करेगा. आयोग का यह आदेश इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इसे E20 पेट्रोल से जुड़े भारत के पहले बड़े उपभोक्ता आयोग के फैसले के तौर पर देखा जा रहा है |


इस मामले में आजतक ने आयोग में शिकायकर्ता डॉक्टर प्रेमराज डेब्टा से विस्तार से बात की और पूरा मामला समझने की कोशिश की | तो आइये जानें क्या है पूरा विवाद क्या है?


क्या है मामला ?

डा. प्रेमराज डेब्टा पेशे से नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) हैं, उन्होंने ने बताया कि, उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी के नेक्सा डीलरशिप से बेची जाने वाली Maruti Grand Vitara स्ट्रांग हाइब्रिड जेटा प्लस वेरिएंट खरीदा था, उस वक्त उन्हें डीलरशिप द्वारा बताया गया कि, ये कार दिसंबर 2023 की बनी हुई है | लेकिन बाद में आयोग के माध्यम से उन्हें पता चला कि, ये कार जनवरी 2023 की मैन्युफैक्चर्ड है |


प्रेमराज का कहना है कि, उन्हें रोजाना 150 से 200 किमी तक की ड्राइव करनी होती है और इसी वजह से उन्होंने हाइब्रिड कार चुनी, जब उन्होंने कार खरीदी तो शुरुआती दिनों में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 11 नवंबर 2024 में अचानक से उनकी कार में कुछ तकनीकी खराबी आई और उनके कार के डैशबोर्ड पर इंजन मॉलफंक्शन का साइन दिखाने लगा |


जिसके बाद प्रेमराज अपनी कार को लेकर डीरशिप पर पहुंचे, चूंकि ये समस्या पहली बार दिखी थी वो आश्वस्त थें कि, कुछ टेक्निकल प्राब्लम होगी जो डीलरशिप द्वारा ठीक कर दी जाएगी | लेकिन डीलरशिप ने बताया कि, उनकी कार में मिलावटी पेट्रोल (Contaminated Fuel) डाला गया है | जिसके चलते ये समस्या आई है, इसके बाद उनकी कार का पूरा पेट्रोल टैंक खाली कराया गया और जांच में पाया गया कि, गाड़ी से निकाले गए फ्यूल में कोई अलग तरह का तरह पदार्थ था, जो नीचे जमा हुआ था |


इस घटना के बाद प्रेमराज तत्काल पेट्रोल पंप पर इस बात की शिकायत दर्ज कराई और कंपनी को भी ई-मेल किया | जिसके 4-5 दिनों के बाद पेटोल पंप की तरफ से जवाब आया है कि, जांच में उनके फ्यूल में किसी तरह की कोई समस्या नहीं पाई गई है, इस मामले के कुछ दिनों के बाद फिर गाड़ी बंद हुई, जिसके बाद फिर से फ्यूल टैंक को साफ कराया गया, डीलरशिप का कहना था कि, संभव है कि मिलावटी पेट्रोल का कुछ हिस्सा अभी टैंक में जमा हो |


नहीं थमा सिलसिला... मिला 5.30 लाख का बिल -

लेकिन यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, गाड़ी फिर बंद हुई और उसे घर से टो (Tow) करवाकर वर्कशॉप पर पहुंचाया गया, प्रेमराज का कहना है कि, इस दौरान गाड़ी तकरीबन 1 महीने तक कंपनी के वर्कशॉप पर ही खड़ी रही और कुछ दिनों बाद उन्हें डीलरशिप द्वारा ई-मेल के द्वारा बताया गया कि, "मिलावटी पेट्रोल के कारण आपका इंजन खराब हो गया है, और पूरा इंजन बदलना पड़ेगा. जिसका खर्च लगभग 5.30 लाख रुपये के आसपास आएगा. और ये रिपेयरिंग वारंटी में कवर नहीं होगा |"


इस घटना के बाद मारुति सुजुकी की टेक्निकल टीम और डीलरशिप के साथ प्रेमराज की मीटिंग हुई, एक बार फिर से गाड़ी को ठीक कर के उन्हें सौंपा गया, इस बार उन्होंने डीलरशिप के कर्मचारियों के सामने ही पेट्रोल भरवाया लेकिन गाड़ी 10 किमी भी ठीक ढंग से नहीं चल पाई और कार एक बार फिर "हाइब्रिड मॉलफंक्शन" का साइन दिखाकर बंद हो गई. जिसके बाद फिर से गाड़ी का फ्यूल टैंक खाली कराया गया, लेकिन इस बार मामला और गंभीर नज़र आया |


प्रेमराज का कहना है कि, "इस बार फ्यूल टैंक खाली कराने के बाद पेट्रोल में बिल्कुल दही जैसा पदार्थ निकल रहा था | उपर की तरफ पेट्रोल था और नीचे दही (Curd) जैसा पदार्थ जमा हुआ था." चूंकि, कार की समस्या सही नहीं हो पा रही थी तो प्रेमराज ने गाड़ी को डीलरशिप पर ही खड़ा कर दिया और दूसरी गाड़ी या फुल रिफंड की मांग करने लगे | जिसे डीलरशिप द्वारा मना कर दिया गया |


कोर्ट पहुंचा मामला -

थक हार कर प्रेमराज ने कोर्ट की तरफ रूख किया और उन्होंने रायपुर कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमिशन में शिकायत की. वाहन निर्माता और डीलर ने आयोग के सामने दावा किया कि संबंधित मॉडल E20 पेट्रोल के साथ पूरी तरह कम्प्लायंट है. उनका कहना था कि वाहन में आई खराबी का कारण सामान्य वियर-टियर, मेंटनेंस में कमी या अन्य तकनीकी वजहें हो सकती हैं, कंपनी ने यह भी कहा कि E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने का कोई ठोस सबूत नहीं है |


कोर्ट ने क्या कहा -

रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग कंपनी की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ | आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वाहन मालिक ने कई बार अधिकृत वर्कशॉप में गाड़ी की मरम्मत कराई, लेकिन हर बार वही समस्या दोबारा सामने आई | आयोग ने माना कि लगातार मरम्मत के बावजूद खराबी का बने रहना इस बात का संकेत है कि समस्या का सही समाधान नहीं किया गया |


आयोग की सबसे अहम टिप्पणी E20 पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर रही | आदेश में कहा गया कि अब अधिकतर पेट्रोल पंपों पर E20 पेट्रोल ही सामान्य रूप से उपलब्ध है, ऐसे में उपभोक्ता के पास दूसरा विकल्प नहीं बचता. इसलिए किसी वाहन मालिक से यह उम्मीद करना उचित नहीं है कि वह E20 पेट्रोल का इस्तेमाल न करे, जबकि दूसरा फ्यूल आसानी से उपलब्ध ही नहीं है |


मुआवजा देने का आदेश -

आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए वाहन निर्माता और डीलर को निर्देश दिया कि वे वाहन मालिक के मरम्मत पर हुए खर्च की भरपाई करें, इसके साथ ही मानसिक परेशानी और कानूनी प्रक्रिया में हुए खर्च के लिए भी मुआवजा देने का आदेश दिया गया. आयोग ने भुगतान के लिए एक तय समय सीमा भी निर्धारित की है, यदि तय समय के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा |


प्रेमराज बताते हैं कि, आयोग का आदेश अभी दो दिन पहले ही आया है. जिसमें कार कंपनी को इसी मॉडल की नई E20 कार या पूरा पैसा (तकरीबन 20.50 लाख रुपये), मानसिक परेशानी झेलने के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी प्रक्रिया में खर्च के मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपये देने का आदेश दिया है. इसके लिए आयोग ने कंपनी को 45 दिन का वक्त दिया है. फिलहाल, प्रेमराज कंपनी या डीलरशिप के जवाब या उनके द्वारा संपर्क किए जाने का इंतजार कर रहे हैं |


अहम सवाल...

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जिस कार को शिकायतकर्ता को बेचा गया था, वह देश में इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल लागू होने के बाद बेची गई थी. इसके बावजूद वाहन E20 फ्यूल के अनुरूप नहीं था. आयोग ने माना कि इसी वजह से E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद कार में बार-बार इंजन से जुड़ी खराबियां सामने आईं. आयोग ने इसे गंभीर कमी मानते हुए कहा कि उपभोक्ता को ऐसे वाहन की वजह से लगातार परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा |


E20 पॉलिसी और कंज्यूमर राइट्स पर बढ़ेगी बहस

यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत सरकार देशभर में इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ा रही है. ऐसे में यह मामला कंज्यूमर राइट्स, वाहन कंपनियों की जिम्मेदारी और E20 फ्यूल की रियल कम्पैटिबिलिटी जैसे अहम सवालों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला सकता है. आने वाले समय में इस फैसले का असर ऐसे अन्य मामलों पर भी देखने को मिल सकता है |

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