तखतपुर में मुक्तिधाम मार्ग को लेकर गरमाया विवाद: निजी जमीन पर बाउंड्रीवाल से रुका अंतिम संस्कार...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
(तखतपुर): छत्तीसगढ़ के तखतपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत डोमनपुर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां श्मशान घाट (मुक्तिधाम) तक पहुंचने वाले पारंपरिक रास्ते पर अचानक बाउंड्रीवाल बनाए जाने के कारण अंतिम यात्रा के दौरान गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो गया। हालात बिगड़ने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आया और दोनों पक्षों की मौजूदगी में रास्ता बहाल कर अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।
क्या है पूरा घटनाक्रम ?
मिली जानकारी के अनुसार, डोमनपुर गांव में किसी ग्रामीण के निधन के बाद शव को जब मुक्तिधाम ले जाया जा रहा था, तब रास्ते में निजी जमीन पर अचानक खड़ी की गई बाउंड्रीवाल के कारण मार्ग पूरी तरह बंद मिला। शव यात्रा बीच में ही अटक जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने बिना देर किए तुरंत स्थानीय तहसीलदार और थाना प्रभारी से गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके का मुआयना किया और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तत्काल रास्ता खुलवाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई।
एक सदी पुराना रास्ता होने का दावा -
गाँव के सरपंच प्रतिनिधि विजय जायसवाल का कहना है कि यह मार्ग कोई नया रास्ता नहीं है, बल्कि ग्रामीण पिछले करीब 100 वर्षों से इसी पारंपरिक रास्ते का इस्तेमाल निस्तारी और शव यात्रा के लिए करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि निजी भूमि स्वामियों द्वारा बार-बार इस रास्ते पर अतिक्रमण कर दीवारें खड़ी कर दी जाती हैं, जिससे हर बार ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी है कि इस मार्ग को हमेशा के लिए खुला रखने का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अड़चनें दोबारा पैदा न हों।
प्रशासन और भूमि स्वामी का पक्ष -
इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस जमीन से रास्ता गुजर रहा है, वह निजी स्वामित्व के अधीन है। तहसीलदार शशांक शेखर शुक्ला ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। हालात की नजाकत को समझते हुए तात्कालिक तौर पर रास्ता निकालकर शव को सुरक्षित रूप से मुक्तिधाम पहुंचाया गया और अंतिम संस्कार कराया गया।
दूसरी ओर, भूमि के मालिक हितेश चंद्राकर ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका पक्ष है कि संबंधित भूमि उनकी निजी संपत्ति है और इससे जुड़े पुराने मामलों में न्यायालय से उनके पक्ष में फैसले आ चुके हैं। उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के उनकी बाउंड्रीवाल को तोड़कर जबरन रास्ता बनाया गया है। भू-स्वामी ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
निष्कर्ष और स्थायी समाधान की मांग -
फिलहाल प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मामला शांत करा दिया गया है और अंतिम संस्कार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है। हालांकि, ग्रामीणों और निजी भूमि मालिक के बीच का यह विवाद अभी पूरी तरह थमा नहीं है। एक तरफ जहाँ ग्रामीण अपनी पुरानी परंपरा और आवागमन के अधिकार की बात पर अडिग हैं, वहीं दूसरी तरफ भू-स्वामी अपने मालिकाना हक पर कायम हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील और उलझे हुए रास्ते के विवाद का क्या स्थायी और संतोषजनक हल निकालता है।






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