चुनाव ड्यूटी से बचने कर्मचारी तरह-तरह की हथकंडे अपना रहे हैं। कोई बीमारी का बहाना बना रहा है तो कोई किसी जुगाड़ में लगा हुआ है। अधिसूचना जारी होने के बाद भी सिफारिश का क्रम समाप्त नहीं हो रहा। ऐसे में रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने चुनाव ड्यूटी से बचने वाले कर्मचारियों पर एक बड़ा प्रहार किया है। अब हालात यह है कि अपनी बीमारी दिखने कर्मचयारी एंबुलेंस में कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं।
कलेक्टर के प्रहार की बात करें तो कलेक्टर ने विभागों को एक पत्र जारी करते हुए कर्मचारियों की जानकारी मांगी है। ऐसे कर्मचारियों की जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है या फिर 20 वर्ष से अधिक सेवा काल बिता चुके हैं और शारीरिक रूप से कमजोर हो गये हैं। इन कर्मचारियों को शारीरिक क्षमता की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में शासकीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
कलेक्टर का प्रयास है कि ऐसे कर्मचारियों को वीआरएस दे दिया जाए। नियम की ओर गौर करें तो पता चलता है कि शासन के प्रावधान के अनुसार मूलभूत नियम 56 एवं मध्य प्रदेश सेवा नियम 1976 के नियम 42 के अधीन छानबीन करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रस्ताव परीक्षण शासन स्तर पर भेजा जा सके। ऐसे कर्मचारियों को अनिवार्य सेवा निवृत्ति देने का प्रावधान नियम में है।
अगर इस बात पर गौर करे कि चुनाव के वक्त अनिवार्य सेवा निवृत्ति की जरूरत कहां से आ गई। तो पता चलता है कि निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण कार्य से दूर भागते हुए कर्मचारी अपना नाम कटवाने में लगे हुए हैं। लेकिन कलेक्टर रीवा ने इसके लिए पत्र लिखकर विभागों में हड़कंप मचा दिया है। देखा गया है कि कई कर्मचारी कई तरह की बीमारी का बहाना बनाकर मेडिकल बोर्ड की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
बताया गया है कि वहीं कई कर्मचारी तो ऐसे हैं चुनाव अधिसूचना से पहले ही बीमारी का बहाना बनाकर मेडिकल पर चल रहे हैं। ऐसे लोगों पर भी अब कलेक्टर ने कार्यवाही करने विभागों से कर्मचारियों की जानकारी एकत्र करने में जुटी हुई है।
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