सीएम नीतीश ने स्वतंत्रता सेनानी रामबहादुर व पद्मानंद की प्रतिमा का किया अनावरण....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने आज सहरसा जिले के पंचगछिया ग्राम में कोसी का गांधी स्वतंत्रता सेनानी स्व रामबहादुर सिंह और उनके बड़े बेटे स्व पद्मानंद सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद उन्होंने उनको अपनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि स्व रामबहादुर सिंह व स्व पद्मानंद सिंह की प्रतिमा अनावरण में आने का उन्हे मौका मिला है। आप सबने मुझे आमंत्रित किया इसका मैं अभिनंदन करता हूं और स्व रामबहादुर सिंह व स्व पद्मानंद सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। स्व रामबहादुर सिंह पूर्व सांसद आनंद मोहन जी के दादा थे और स्व पद्मानंद सिंह इनके चाचा थे। पूर्व सांसद आनंद मोहन व उनकी पत्नी पूर्व सांसद लवली आनंद मुझे इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया था। इन लोगों से मेरा पुराने संबंध हैं।
उन्होंने कहा कि रामबहादुर बाबू का जन्म 1901 में और उनकी मृत्यु 1950 में हो गई थी। रामबहादुर बाबू स्वामी सहजानंद सरस्वती के संपर्क में 1919 में आए और अंग्रेजों के काले कानून रॉलेट एक्ट का विरोध करते हुए गिरफ्तारी दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए रामबहादुर बाबू 1920 में सैकड़ों लोगों के साथ मिलकर कोसी सेवक दल का गठन कर कोसी क्षेत्र में विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर खादी ग्राम उद्योग की शुरुआत की। 1925 में जब गांधीजी बिहार आए और पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज गए तो भ्रमण में रामबहादुर बाबू उनके साथ रहे थे। 1930 में उन्होंने नमक सत्याग्रह में भाग लिया। रामबहादुर बाबू ने बापू से प्रेरणा लेकर लोगों को नशा से दूर रहने का आह्वान किया था।
आज आप सब यहां उपस्थित हैं मैं आपसे कहना चाहता हूं कि बापू की बातों को याद रखें और लोगों को नशा से दूर रहने के लिए प्रेरित करते रहें। वर्ष 1934 में जब बिहार में भूकंप आया था और गांधीजी भूकंप पीड़ितों से मिलने मुंगेर पहुंचे थे तो पंचगछिया ग्राम में रामबहादुर बाबू से मिले थे क्योंकि इनका घर भी भूकंप में ढह गया था। ऐसी स्थिति में भी रामबहादुर बाबू की धर्मपत्नी कुंती देवी जी ने अपना धन बापू को दान में दे दिया था ताकि पीड़ितों की मदद की जा सके। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी रामबहादुर बाबू ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।सीएम ने कहा कि रामबहादुर बाबू के पुत्र पद्मानंद सिंह ब्रह्माचारी ने भी 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था। उनका जन्म 1921 में और मृत्यु 2016 में हुई थी। सीएम ने कहा कि आनंद मोहन से मेरे पारिवारिक संबंध हैं। इनके घर हम पहले भी आते रहे हैं और इनके माता- पिता से आशीर्वाद लेते रहे हैं। आज प्रतिमा अनावरण पर आकर मुझे खुशी हो रही है। कुछ लोग देश के इतिहास को बदलना चाहते हैं लेकिन हम सबको सचेत रहना है।






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