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छत्तीसगढ़: बेटों को संपत्ति दान करना हुआ बेहद सस्ता, कटघोरा के जयनारायण अग्रवाल को हुई 1.59 लाख रुपये की बड़ी बचत....

56 minutes ago
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-

रायपुर: अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति ट्रांसफर करने में अब प्रदेश के लोगों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पंजीयन शुल्क (रजिस्ट्री फीस) में किए गए एक अहम बदलाव के चलते, कोरबा जिले के कटघोरा निवासी जयनारायण अग्रवाल को लाखों रुपये का सीधा फायदा हुआ है।

















जयनारायण अग्रवाल ने हाल ही में अपनी संपत्ति अपने दोनों बेटों के नाम दान की है। पहले इस कानूनी प्रक्रिया में भारी-भरकम रकम खर्च होती थी, लेकिन राज्य शासन द्वारा 'पारिवारिक दानपत्र' पर दी गई भारी छूट के कारण उनका यह काम बेहद कम खर्च में हो गया। इस रियायत से उन्हें करीब 1 लाख 59 हजार रुपये की बड़ी बचत हुई है। 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत जब पंजीयन विभाग की टीम ने उनसे संपर्क किया, तो उन्होंने अपना यह सुखद अनुभव साझा किया।


अब 0.8 प्रतिशत की बजाय लगता है सिर्फ 500 रुपये शुल्क

आपको बता दें कि पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण को आम जनता के लिए आसान और किफायती बनाने के मकसद से यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। नए नियम के तहत अब पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारे की रजिस्ट्री का शुल्क, संपत्ति की कुल कीमत के 0.8 प्रतिशत से घटाकर मात्र 500 रुपये (फ्लैट रेट) कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से उन परिवारों को जबरदस्त फायदा हो रहा है, जो कानूनी रूप से अपनी संपत्ति का बंटवारा या दान करना चाहते हैं, लेकिन भारी खर्च के डर से पीछे हट जाते थे।


शासन की नागरिक-केंद्रित पहल का दिख रहा जमीनी असर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 'विकसित छत्तीसगढ़' के विजन को ध्यान में रखते हुए, वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के निर्देशों पर विभाग में ये सुधार लागू किए गए हैं। इन बदलावों का जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, यह जानने के लिए विभाग 'सेवा संकल्प अभियान' के जरिए सीधे हितग्राहियों से बात कर रहा है।


लाभार्थी जयनारायण अग्रवाल ने इस नई व्यवस्था पर खुशी जताते हुए शासन और पंजीयन विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस सुविधा ने बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के, उनके बेटों को संपत्ति सौंपने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। जयनारायण अग्रवाल की यह कहानी इस बात का साफ प्रमाण है कि सरकारी व्यवस्था में किए गए छोटे-छोटे शुल्क सुधार आम जनता के लिए कितनी बड़ी राहत का कारण बन सकते हैं।

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