google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

बिलासपुर: नाबालिग आत्महत्या मामले में तत्कालीन SP को हाजिर होने का निर्देश...

Aug 23
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरिया जिले के बैकुंठपुर में 17 वर्षीय नाबालिग की आत्महत्या मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि जब आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित थीं, तब पुलिस ने उन्हें अपनी वेबसाइट पर फरार घोषित कर गिरफ्तारी के लिए इनाम क्यों जारी किया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की पीठ में हुई। कोर्ट ने पुलिस से यह भी जानकारी मांगी है कि आरोपियों को फरार घोषित करने और उनके खिलाफ प्रेस विज्ञप्ति जारी करने से पहले पुलिस के पास कौन-कौन से तथ्य और साक्ष्य मौजूद थे। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या इस संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय से कोई जानकारी या कानूनी सत्यापन लिया गया था। मामला बैकुंठपुर स्थित आईसी मार्ट से जुड़ा है। आरोप है कि 7 जुलाई को 17 वर्षीय नाबालिग अपनी 14 वर्षीय चचेरी बहन के साथ आईसी मार्ट गई थी। वहां मार्ट संचालक और कर्मचारियों ने दोनों पर चोरी का आरोप लगाया। आरोप है कि दोनों से खाली कागज पर सामान की सूची लिखवाई गई और चोरी स्वीकार करने संबंधी लिखित बयान भी लिया गया। साथ ही नाबालिग की स्कूटी भी कथित तौर पर मार्ट संचालक ने अपने कब्जे में रख ली थी।


घटना के अगले दिन 8 जुलाई को नाबालिग ने कथित रूप से सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने दीपक, विनोद और जगत वैद्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की गई थीं, जो उस समय लंबित थीं। इसी दौरान कोरिया पुलिस की वेबसाइट पर आरोपियों को फरार बताया गया और उनकी गिरफ्तारी के लिए पहले 5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया। हाईकोर्ट ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मृतका के पिता और चाचा को जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाए। यदि जांच में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका सामने आती है तो कोर्ट इसे गंभीरता से लेगा। अदालत ने पुलिस से 10 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति, कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर रिपोर्ट भी अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।


बिजली कंपनी की 26.88 लाख की मांग पर उपभोक्ता को राहत

इसी दिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने बिजली कंपनी की ओर से की गई 26.88 लाख रुपये की अतिरिक्त भुगतान मांग को लेकर उपभोक्ता को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि जब मीटरिंग और बिलिंग व्यवस्था पूरी तरह बिजली कंपनी के नियंत्रण में थी और उपभोक्ता पर किसी तरह की धोखाधड़ी का आरोप नहीं है, तो कंपनी अपनी गलती का आर्थिक भार उपभोक्ता पर नहीं डाल सकती। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने रायपुर निवासी कारोबारी विकास टांक की रिट अपील स्वीकार करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने विद्युत लोकपाल के पूर्व आदेश को बहाल कर दिया है। याचिकाकर्ता श्रीराम वायर्स के संचालक हैं। उनके प्रतिष्ठान में 90 हॉर्स पावर का विद्युत कनेक्शन था। वर्ष 2008 में परिसर में करंट ट्रांसफॉर्मर लगाया गया था और 2011 में मीटर बदला गया था। वर्ष 2017 में बिजली कंपनी को जानकारी मिली कि बिजली खपत की गणना के लिए निर्धारित 2 के मल्टीप्लाइंग फैक्टर की जगह 1 का इस्तेमाल किया जा रहा था।


इसके बाद बिजली कंपनी ने वर्ष 2008 से 2017 तक की अवधि के लिए अतिरिक्त राशि की मांग कर दी। इस पर उपभोक्ता ने आपत्ति दर्ज कराई और मामला न्यायालय तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कंपनी नौ साल की अवधि के लिए अतिरिक्त राशि मांग रही है तो उसे ठोस प्रमाणों के आधार पर यह साबित करना होगा कि पूरी अवधि में गलत फैक्टर का इस्तेमाल हुआ था। केवल कंपनी की गलती के आधार पर उपभोक्ता से अतिरिक्त भुगतान नहीं कराया जा सकता। डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को रद्द करते हुए विद्युत लोकपाल के आदेश को बहाल कर दिया। अब बिजली कंपनी की कोई भी मांग लोकपाल के आदेश के अनुसार ही तय होगी।


Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html