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बिलासपुर: 9 साल तक जमानतदार न मिलने से जेल में बंद रहा युवक....

Aug 23
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बिलासपुर गरीबी और कानूनी सहायता की कमी के कारण न्याय तक पहुंचने में आने वाली मुश्किलों की एक बड़ी तस्वीर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले से सामने आई है। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहे जांजगीर निवासी देव प्रकाश यादव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 20 अगस्त 2026 को बरी कर दिया। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें वर्ष 2016 में ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन जमानतदार की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण वह करीब नौ साल तक जेल में ही बंद रहे। देव प्रकाश यादव की रिहाई के लिए अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2022 में वह देव प्रकाश के पिता 70 वर्षीय बंशी यादव के संपर्क में आईं। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की जानकारी जुटाई और हाईकोर्ट में याचिका दायर कर देव प्रकाश की रिहाई का रास्ता तैयार किया। प्रियंका शुक्ला आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने वाली संस्था ‘जनहित चैंबर’ से जुड़ी हैं। मामले के अनुसार बंशी यादव भी इसी हत्या प्रकरण में आरोपी बनाए गए थे। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वह निजी वकील नहीं कर पाए। हालांकि वर्ष 2015 में अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया था। वहीं उनके बेटे देव प्रकाश यादव को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी और 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।


बेटे के जेल जाने के बाद बंशी यादव की आर्थिक स्थिति और खराब होती चली गई। परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं बचा। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। जमीन और मकान पर कब्जे जैसी समस्याएं भी सामने आईं। कई बार उन्हें मंदिर या पेड़ के नीचे रात बितानी पड़ी और जीवन चलाने के लिए भीख मांगने तक की नौबत आ गई। इसके बावजूद बंशी यादव ने बेटे को जेल से बाहर निकालने की उम्मीद नहीं छोड़ी। वह लगातार अलग-अलग जगहों पर वकीलों से संपर्क करते रहे। वर्ष 2022 में जब वह अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के पास पहुंचे, तब उनके पास मामले से जुड़ी पूरी कानूनी फाइल भी उपलब्ध नहीं थी। उनके पास सिर्फ बेटे का नाम और मामले से संबंधित कुछ अधूरी जानकारी थी। प्रियंका शुक्ला ने मामले की जांच शुरू की। दस्तावेजों और न्यायालयीन रिकॉर्ड की पड़ताल में पता चला कि देव प्रकाश यादव को हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में ही जमानत दे दी थी। लेकिन जमानतदार उपलब्ध नहीं होने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सके थे। इसके बाद वर्ष 2022 में हाईकोर्ट में उनकी रिहाई के लिए याचिका दायर की गई। सुनवाई के बाद अदालत ने व्यक्तिगत बंधपत्र के आधार पर उनकी रिहाई का आदेश दिया। इस तरह करीब नौ साल बाद देव प्रकाश यादव जेल से बाहर आ सके।


रिहाई के समय देव प्रकाश काफी भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि वह जेल से बाहर आ गए हैं। उन्हें डर था कि कहीं उनकी पूरी जिंदगी जेल में ही न गुजर जाए। इसके बाद मामले की अंतिम सुनवाई 20 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति राधाकृष्ण अग्रवाल की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने देव प्रकाश यादव को हत्या के मामले में बरी कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद देव प्रकाश यादव के खिलाफ चल रही उम्रकैद की सजा समाप्त हो गई और उन्हें मामले में पूर्ण राहत मिल गई। अदालत के फैसले से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि यह मामला केवल कानूनी लड़ाई का नहीं, बल्कि उन लोगों की परेशानी को दिखाता है जो गरीबी और संसाधनों की कमी के कारण अपने अधिकारों तक नहीं पहुंच पाते। इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि अदालत से राहत मिलना और उस राहत को वास्तविक जीवन में हासिल कर पाना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं। देव प्रकाश यादव को जमानत मिलने के बावजूद केवल जमानतदार नहीं मिलने के कारण वर्षों जेल में रहना पड़ा। यह घटना न्याय व्यवस्था में कानूनी सहायता और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की अहमियत को भी सामने लाती है।

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