अंतरजातीय विवाह पर लगा बैन, छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज की नई नियमावली, पढ़ें पूरी ख़बर...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :- रिपोर्ट कथित 'लव जिहाद' पर बढ़ती रिपोर्टों से प्रभावित होकर, आदिवासियों में अंतरधार्मिक विवाह की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रदेश के नारायणपुर में आदिवासी समुदाय ने विशेष रूप से लड़कियों के लिए, अन्य जातियों या धर्म में विवाह बंधन में बंधने के खिलाफ एक आदेश जारी किया है।
आदिवासी समाज ने आदिवासियों के अलावा किसी अन्य जाति में शादी करने पर दुल्हन के परिवार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया। और यदि वे दंडात्मक जुर्माना देने से इनकार करते हैं, तो पूरे परिवार को बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
आदिवासी संगठन के संयोजक और युवा विंग के प्रभारी जेकी कश्यप ने कहा आदिवासी लड़कों को दूसरी जाति में शादी करने से रोकने के लिए एक गाइडलाइन जारी की है. सर्व आदिवासी समाज की महिला शाखा उपाध्यक्ष अनीता कुरेटी ने दंडात्मक जुर्माने के फैसले को 'क्षति नियंत्रण अभ्यास' के रूप में वर्णित किया है, उन्होंने कहा कि आदिवासी युवा तेजी से गुमराह हो रहे हैं और अन्य जातियों में शादी के बाद वे अपनी संस्कृति और जड़ों से संपर्क खो देते हैं। “हम वर्तमान युवा युवतियों में एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देख रहे हैं जहां आदिवासी लड़कियों को अक्सर दूसरी जाति या धर्म में अपनी शादी करते देखा जाता है। पूरा आदिवासी समाज काफी चिंतित रहता है. समुदाय के वरिष्ठ नेताओं ने शादी के बाद भागने वालों पर जुर्माना लगाने के लिए एक सख्त कदम उठाने का फैसला किया। इस तरह की शादियां अक्सर आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच तनाव पैदा करती हैं”।
आदिवासी संस्कृति और बस्तर लोक परंपरा के विद्वान शिव पांडे ने कहा, ऐसा इसलिए है क्योंकि सामुदायिक जीवन अक्सर आदिवासियों के लिए एक मजबूत महत्व रखता है। आदिवासियों के बीच यह आशंका घर कर गई है कि उनके 'शिक्षित' युवा गैर-आदिवासियों को अपने साथी के रूप में चुनने के लिए 'स्वतंत्र' निर्णय ले रहे हैं। आदिवासी समाज में "अनुष्ठान परंपराओं के लिए अनुशासन बनाए रखने" की थीम पर पूरे परिवार के लिए सामाजिक अलगाव की ऐसी सजा को गहरे अदृश्य दर्द के रूप में महसूस किया जाता है और मृत्युदंड से भी बदतर माना जाता है।
तर्कवादी और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तकर्ता डॉ. दिनेश मिश्रा ने कहा कि “ऐसी संकीर्ण सोच की बढ़ती प्रथा का विरोध किया जाना चाहिए। यह प्रगति को रोकता है. सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ एक कानून होना चाहिए क्योंकि यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है”। इस तरह के निर्णय को अस्वीकार कर दिया और कहा कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को अंतरजातीय विवाह करने का कानूनी अधिकार है और किसी को भी अन्य धर्मों में विवाह करने के आधार पर किसी को प्रतिबंधित या बहिष्कृत नहीं करना चाहिए।
अंतरजातीय विवाह के संबंध में, आदिवासी नेताओं ने अपनी सामुदायिक बैठकों के दौरान अपने समाज को संगठित रखने और विभिन्न जातियों या धर्मों के साथ विवाह करने से बचने पर जोर दिया।






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