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बांस भविष्य का व्यवसाय: मोहन वर्ल्यानी, प्रगतिशील बांस किसान...

Sep 17, 2023
3 min read





























































पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

मूलत: बांस की खेती से जुड़े किसान मोहन वर्ल्यानी प्रदेश के ऐसे किसान हैं जो देश के विभिन्न राज्यों के बांस की खेती छत्तीसगढ़ में कर रहे हैं वर्ल्यानी दुर्ग जिले के ग्राम खपरी, तहसील अहिवारा में लगभग 10 एकड़ में बांस की खेती कर रहे हैं। बांस की प्रजातियों में बंबूसा बलकोआ (भीमा बांस) के अलावा अन्य राज्यों की 51 प्रजातियां शामिल है। अलग-अलग राज्यों के 51 प्रजातियों के बांस पौधों का रोपण गणमान्य नागरिकों के द्वारा अडॉप्ट (गोद) करवा कर रोपण किया गया।

# गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम को आवेदन किया गया है जिसे टीम ने सर्वे भी कर लिया है।

# बंबूसा बालकोआ तेजी से बढ़ता है और सॉलिड रहता है इससे एथेनॉल फ्यूल आदि बनाने के काम आते हैं। बंबूसा टूलड़ा जाति के बांस नरम रहते हैं बैंड भी हो जाता है अगरबत्ती, पतंग स्टिक, चम्मच बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। बंबूसा न्यू ट्रस जाति के पास सजावटी बांस कहलाते हैं इससे आभूषण, गहने, चटाई बनाई जाती है।

बांस पूरे विश्व में पहला स्थान चीन उसके बाद भारत का नाम आता है वर्ल्यानी ने बताया कि भारत में बांस की 136 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि बांस को ग्रीन गोल्ड भी कहा जाता है मौसम की बेरुखी से किसान अक्सर फसलों को लेकर चिंतित रहते हैं यही मात्र एक ऐसा पौधा है जिसे प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नहीं पड़ता फसल पर रोग या मौसम परिवर्तन का असर नहीं पड़ता बांस की खेती की सबसे अच्छी बात यह पर्यावरण संतुलन में भी सहयोग करती है वर्ल्यानी का कहना है कि बांस की फसल के लिए किसी भी प्रकार की मिट्टी में रोपण किया जा सकता है यह जमीन को उपजाऊ बनाने के साथ-साथ पानी का ग्राउंड लेबल बनाने में प्रकृति की मदद करता है जिसका लाभ किसानों एवं आम नागरिकों को मिलता है।


छत्तीसगढ़ शासन की "मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना" का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य के कृषकों की भूमि पर वाणिज्यिक प्रजातियों के पौधे ( बांस ,नीलगिरी, सागोंन,) वृक्षारोपण उपरांत समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था के साथ-साथ पात्र किसानों को 5 एकड़ तक भूमि पर 100% अनुदान एवं 5 एकड़ से अधिक भूमि में होने पर उन्हें 50% अनुदान दिया जाएगा शेष राशि किसानों को स्वयं वहन करना होगा।

ग्लोबल वार्मिंग का असर सबसे ज्यादा किसानों की फसलों पर पड़ता है जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए पानी और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना और पेड़ लगाना महत्वपूर्ण हो जाता है लेकिन पेड़ धीमी गति से बढ़ता है बांस का पोधा बहुत तेजी से बढ़ता हैं क्योंकि बांस एक घास की प्रजाति है इसलिए जंगल को साफ किए बिना परिपक्व सूट (तनो) की वार्षिक आधार पर कटाई की जा सकती है बांस अन्य पेड़ों की तुलना में 30% अधिक ऑक्सीजन देता है और 30% कार्बन डाई ऑक्साइड अधिक सोकता है।


बी बैंबू फाउंडेशन की आवश्यकता क्यों...?

फाउंडर मोहन वर्ल्यानी ने बताया की ग्लोबल वार्मिंग की बड़ी चिंता और चिंतन का विषय है* खासकर विकसित देशो में युवा पीढ़ी के बीच निराशा बढ़ रही है। हमें जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना होगा और बांस ही एक ऐसा पौधा है जो वायुमंडल को संतुलित करके सबसे ज्यादा अपनी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यही हमारी पहल प्रकृति पर संतुलन बनाए रखना है हमारे पुनः वर्णिकरण प्रयासों में और भी अधिक मदद कर बांस के प्रजनन को अपनाना ही सही रास्ता है आईये मिलकर एक पौधा दान करें या गोद ले। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:


बांस की खेती एक बार लगाकर 70 से 80 वर्षों तक प्रतिवर्ष कटिंग करते हुए दैनिक उपयोग के सामानों का जैसे डिस्पोजल प्लेट, चम्मच, कटोरी, टूथब्रश, कपड़े अगरबत्ती, फर्नीचर , टोकरी, सेनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, हैंडीक्राफ्ट, का निर्माण करते हुए अपना रोजगार का निर्माण कर सकते हैं।

 
 
 

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