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रायपुर में नशे का नया चेहरा, होटल-क्लब संचालक परोस रहे जहर...

Sep 8
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायपुर :- राजधानी रायपुर में बढ़ते नशे के कारोबार से लोग काफी चिंतित हैं। यह एक गंभीर और चिंताजनक विषय बन गया है। अब युवा गांजा अफीम के जगह अब सिंथेटिक ड्रग्स जैसे एमडीएमए, कोकीन और एलएसडी ने लेना चालू कर दिया है जो काफी गंभीर विषय है। एक बार लत लगने के बाद सीधे मौत है। पैसे के लालच में होटल व क्लब संचालक ये सब ड्रग्स युवाओ को परोस रहे हैं साथ ही नियमों को ताक पर रखकर अपना खुद का कानून चलाने लगते हैं, तो यह सीधे तौर पर कानून-व्यवस्था और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा होता है।


होटल, क्लब और बार वाले नियमों को ताक कर देर रात तक पार्टियों का आयोजन, रेव पार्टियां आयोजित करते हैं और वहां प्रतिबंधित नशीले पदार्थ परोसते हैं। कुछ होटल,बार और क्लब संचालक ऊंचे रसूख या भ्रष्टाचार के बल पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन के नियमों (जैसे समय सीमा और सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता) का उल्लंघन करते हैं।


युवाओं को आकर्षित करने लुभावने विज्ञापन-

युवाओं को आकर्षित करने वाट्सअप और शोसल मिडिया में तरह तरह के विज्ञापन देकर कॉलेज और स्कूल वाले युवाओं को अपनी जाल में फंसते हैं वे आसानी से इन जगहों पर नशे की गिर त में आ जाते हैं। मजे की बात गर्ल्स भी इनके चंगुल में आ जाते हैं, राजधानी में बाहर से युवतियां पढ़ने आती हैं और शहर की चकाचौंध देखकर वे अपने आप को पार्टी में जाने से रोक नहीं पाती और गिरोह के चंगुल में फंस जाती हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।


राजधानी के हर मोहल्ले में नशे के सौदागर-

छत्तीसगढ़ के रायपुर में अवैध नशे, सट्टेबाजी और देर रात तक संचालित होने वाले बार एवं होटलों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। शहर के विभिन्न इलाकों से स्थानीय लोगों ने नशे और अन्य अवैध गतिविधियों के बढ़ने की शिकायत की है। नागरिकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कई स्थानों पर अवैध कारोबार फिर से सक्रिय हो जाते हैं। लोगों ने राजधानी में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सतत कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने बताया कि राजधानी के कई बार, क्लब और होटल देर रात तक शराब परोसते रहते हैं। वीआईपी रोड सहित आउटर में हर बार में देर रात तक लोगों का आनाजाना लगा रहता है।


बार से निकलने के बाद नशे की हालत में स्थानीय रहवासियों से इन स्थानों पर अक्सर विवाद, मारपीट और शोर-शराबे की घटनाएं भी सामने आती हैं। यही हाल शहर के कई इलाकों का है जहां सट्टा, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की अवैध बिक्री की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी, खमतराई, तेलीबांधा, रायपुरा, टाटीबंध और नवा रायपुर, टाटीबंध, कटोरातालाब, ईदगाहभाठा, नेहरूनगर, नयापारा, संजयनगर, संतोषीनगर, बोरियाखुर्द आदि ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ के स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि राजधानी के कई क्षेत्रों में नशे का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। हालांकि, पुलिस समय-समय पर कार्रवाई करती रही है, लेकिन लोगों का मानना है कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोग लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं। इससे इन पर प्रभावी नियंत्रण पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।


प्रशासन से सतत कार्रवाई की मांग-

राजधानी के सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध नशे के कारोबार, सट्टेबाजी और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने की मांग की है साथ ही दोषी लोगों या इस अनैतिक धंधे में शामिल लोगों पर सतत कार्रवाई की जानी चाहिए। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ड्रग टास्क फोर्स द्वारा स त एक्शन लिया जाना जरूरी है, जिसमें अवैध रूप से चल रहे हुक्का बार, पब और होटलों पर अंकुश लगाकर उनके लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए।


राजधानी रायपुर में एक से बढ़कर एक नाइट क्लब-

तेज़ संगीत, रंग-बिरंगी लाइटों और ठुमकते हुए लोगों को देखकर रायपुर में नहीं बल्कि दुबई या थाईलैंड के किसी क्लब में होने का अहसास होता है। जहां खूंखार किस्म के बाउंसर भी दिख जाते हैं। यानी उन्हें कुछ भी गड़बड़ दिखा तो लोगों का नशा तुरन्त कफूर कर देते हैं। नाइट क्लब के अंदर शराब के जाम थामे अधेड़ अंकल, आंटियाँ और युवा सब अपनी-अपनी मस्ती में मग्न नज़र आते हैं, किसी को किसी के मौजूद रहने का ज़रा भी संकोच नहीं सब अपनी बेबी के साथ मस्त रहते हैं। नाइट क्लब में विदेशी स्टाइल में मास्क लगाए एक खोमचे वाला घूमते भी दिखेगा जो बोलता फिरता है कि वोदका शॉट ले लो- वोदका शॉट! क्तक्र कोड से ऑन-द-स्पॉट पेमेंट और छोटे गिलास में तत्काल सेवा।


क्लब में शराबियों के जमा झुंड को शराब परोसना बंद करने का समय क्लब के मालिक तय करते हैं। नाइट क्लब से बाहर निकलते समय कई युवा लड़के-लड़कियाँ मैनेजमेंट से शराब के एक और 'पैग' के लिए गिड़गिड़ाते भी रहते हैं जिसे क्लब का मालिक अपने हिसाब से रुपए लेकर पैग दिलवाता है। अधेड़ लोग नशे में धुत्त अपनी बेबी को बाहों में संभालते हुए सीढ़ियों की तरफ़ जाते भी दिखते हैं।


नाइट क्लब में आने के बाद लोगों को रायपुर में नहीं विदेश में होने का एहसाह होता है। ऐसा मज़ा विदेश न जाकर राजधानी में ही विदेश का मज़ा भी मिल जाता है क्योंकि क्लब मालिक अपने ग्राहकों के लिए विदेशी बाला भी बुलवा कर तैयार रखते हैं। सिर्फ जुबान हिलाने की जरूरत होती है, सेवा में हाजिर कर देते हैं। ये है हमारा रायपुर, सचमुच लोग अब बदल गए हैं, प्रगतिशील हो गए हैं। यही देखना बाकी रह गया था, क्या यही हमारी संस्कृति है?

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