""वन्य प्राणी चीतल"" 'जंगल से भटक शहर में जान गवाया'

प्राप्त सूचना के अनुसार समीप के जंगल से पानी की तलाश में या अपने झुण्ड से भटक कर यह चीतल बसना शहर में आ गया।
आज सुबह लगभग 10 बजे
बसना रहवासी इलाके में सबसे पहले लोंगो ने पुष्प वाटिका में देखा, यह मादा चीतल बड़ी फुर्ती से दीवार फांदता हुआ हाई स्कुल बसना के मैदान में कूद गया।यह मैदान काफी बड़ा है जो चारों ओर से बाउंड्री वाल से घिरा हुआ है। उसके ऊपर एंगल से 1 मीटर की ऊंचाई तक कांटेदार तार लगाई हुई है। यह जानवर यहां भी भागता फांदता दीवार लांघने की कोशिश करता रहा। वन विभाग परिक्षेत्र अधिकारी बसना ने सूचना पाते ही अपनेअमले के साथ उक्त स्थल पहुंच कर चीतल को सुरक्षित पकड़ने का प्रयास करते रहे। हम आपको बताना चाहेंगे कि यह स्कूल जिसे कोरोनटाईन सेंटर बनाया गया है।यहां प्रवासी मजदूरों को कोरोटाइन किया गया है।

उन्हें सर्वप्रथम कमरे के अंदर बंद रखकर वन विभाग ने यह रेस्क्यू किया ।इस दौरान उस मादा चीतल ने काफी भागदौड़ और दीवार फांदने की कोशिश की जिसमें वो काफी जख्मी हो गई थी।अंततः वन विभाग ने उक्त प्राणी को पकड़कर पशु चिकित्सक जे,आर,नायक से प्राथमिक उपचार करवा।पेट का हिस्सा कंटीले तार से फट चुका था। अतः चिकित्सक ने रायपुर ले जाने की सलाह देते हुए रीफर कर दिया। बसना का वन अमला उक्त वन प्राणी को लेकर रायपुर के लिए रवाना हुआ और कुछ ही किलो मीटर के सफर पर वह घायल वन्य प्राणी चीतल ने प्राण त्याग दिया। जिसे वापस बसना लाया गया।

पशु चिकित्सक ने पोस्टमार्टम किया अतः में वन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी बसना रामलाल व्यवहार एवं उनके अमलो ने उक्त वन्य प्राणी के मृत शरीर का शव दाह किया।
यहां यह बताना लाजिमी होगा कि 2019 में भी एक चीतल सुबह-सुबह जंगल से भटक कर बसना के मुख्य सड़क पर आवारा कुत्तों के द्वारा दौड़ाने पर भाग रहा था उसे भी काफी चोट लगी थी वन विभाग द्वारा रेस्क्यू कर उसे ले जाया गया ।शहर से नजदीक जंगल होने के कारण खासकर पानी की तलाश में यह वन्य प्राणी भटकते हुए आने का सिलसिला अक्सर गर्मियों में देखा गया है।






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