कलेक्टर की फर्जीमंजूरी से खरीद ली आदिवासी जमीन
प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन की आँखों में धुल झोंकने व राजस्व की चोरी तथा आदिवासियों के अधिकारों के हनन का मामला सामने आया है|
विदित हो कि महासमुंद जिले के अंतिम छोर पर रहने वाले पिथौरा तहसील के ग्राम जोगिदादर के बहुचर्चित व्यक्ति साखाराम चौधरी एवं सालिकराम चौधरी, पिता घासीराम चौधरी ने आदिवासी जमीन को कलेक्टर की फर्जी मंजूरी लगाकर उक्त जमींन को अपने नाम कर लिया|

हम आपको बताते चले कि महासमुंद जिले के बसना तहसील के ग्राम पर्रापाठ पटवारी हल्का नंबर 00033 के खसरा 47/1 के रकबा 0.0272 हेक्टेयर, खसरा नंबर 47/3 रकबा 0.6500 एवं खसरा नंबर 47/4 का रकबा 0.0500 कुल 0.7272 अर्थात 1 एकड़ 81 डिसमिल जमीन जो की बसना नगर पंचायत से मात्र 04 की.मी. की दुरी पर राष्ट्रिय राजमार्ग 53 (NH 53) पर है

0दुसरा प्रकरण इन्ही का है जो महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील के ग्राम खुर्सीपहार का है यह जमीन आदिवासी जमीन थी जिसे कलेक्टर महासमुंद की फर्जी मंजूरी से साखाराम सालिकराम चौधरी ने आदिवासी भूमि को अपने दामाद के नाम पर पंजीयन करा लिया, यह भूमि ग्राम खुर्सीपहार में है, जो गोपाल, लोकेश पिता गोवर्धन (अन्य पिछड़ा वर्ग) के नाम से करा लिया यह भूमि खसरा नंबर
40 रकबा 2.0300 हेक्टेयर अर्थात 5.075 एकड़ आदिवासी जमीन जो आज बेश कीमती जमीन है जिसे जालसाजी कर कलेक्टर की फर्जी मंजूरी से आदिवासी जमीन सामान्य हो गयी|
तीसरा :- महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील से ग्राम खुर्सीपहार से ही है जिसका पटवारी हल्का नंबर 00048 रा. नि. मं. साँकरा, खसरा नंबर 56 रकबा 1.3200 हेक्टेयर अर्थात 3.3 एकड़ जमीन जो आज बेश कीमती है, उक्त जमीन को साखाराम सालिकराम ने स्वयं के नाम एवं अपने रिश्तेदारों के नाम रखा है|
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त सभी भूमि के फर्जी मंजूरी लगाकर स्वीकृत करवाया गया है
हम आपको बताते चले कि स्वीकृति हेतु आवेदक देवानंद पिता आनंदसिंह जाति गोंड़ निवासी राजासेवय्या खुर्द का कृषक है जो कि पटवारी हल्का नंबर 40 रा. नि. मं. साँकरा तहसील पिथौरा जिला महासमुन्द के द्वारा अपने स्वामित्व हक़ का जमीन खसरा नंबर 40 एवं 56 को विक्रय करने हेतु कलेक्टर के पास अनुमोदित किया गया था जो पूरी तरह फर्जी है | यह विधिवत प्रकिया में कही भी नहीं है यह छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(6) के अनुसार के विपरीत है, यह प्रक्रिया पूरी तरह फर्जी है विधिवत प्रक्रिया नहीं है प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन समय के पटवारी, आर आई, नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार के कार्यालय में इस भूमि के अनुमति सम्बंधित कोई दस्तावेज नहीं है! जानकारों का कहना है की इसे कलेक्टर के बाबु या अधीनस्थ कर्मचारी से सील सिक्का लगवाकर अनुमति प्रदान की गई है!

इस फर्जीवाड़े के उजागर होने से छत्तीसगढ़ ही नहीं पुरे भारत में राजस्व विभाग को शर्मसार होना पड़ेगा एवं दोषियों को जेल जाना पड़ेगा |
आगे हम आपको वो जानकारी देना चाहेंगे इसी तरह और कई प्रकरण है जो आदिवासी जमीन को साखाराम चौधरी अपने नौकर उत्तम पिता दलगंजन के नाम लिया है और लेता रहा है हम आपको बताते चले की साखाराम का नौकर जिसके नाम आदिवासी जमीन खरीदता रहा है वह नौकर(उत्तम) का स्वर्गवास हो गया है उसकी मृत्यु हो चुकी है|
उत्तम के मृत्यु पश्चात् उक्त सभी जमीन को साखाराम, उत्तम की पत्नी व बच्चों के नाम करवा रखा है
हम आपको बताते चले की जितनी भी जमींन साखाराम ने आदिवासीयों से खरीदी उक्त जमींन को उत्तम के नाम से रखा था वह भी फर्जी है किसी भी जमीन के क्रय के समय उत्तम की जाति प्रमाण पत्र फर्जी है, यह तहकीकात बतलाती है की उत्तम की जाति सम्बंधित प्रमाण पत्र विधिवत है ही नहीं
हम आपको बताते चले की महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील के ग्राम साल्हेतराई के स्कुल के सामने लगभग 5 एकड़ जमीन जो सावित्री बाई पति कमल पालेश्वर के नाम पर थी उसमे भी सावित्री बाई का जाति प्रमाण पत्र फर्जी है हमारी तहकीकात में पिथौरा तहसील में इसका कहीं कोई ज़िक्र ही नही है | यह आदिवासी जमीन जो सावित्री बाई पति कमल पालेश्वर के नाम थी जिसे साखाराम ने अपने नौकर उत्तम के नाम लिया| क्रेता एवं विक्रेता का जाति प्रमाण पत्र विधि वत हुआ ही नही है अर्थात फर्जी हुआ है , वर्तमान में उक्त जमीन को कुरूद के किसी आदिवासी के पास विक्रय कर दिया गया है |
अब हम आपको यह बताते चले की साखाराम चौधरी व उनके भाई सालिकराम चौधरी की क्या हस्ती है|

ये दोनों भाइयो ने साईं प्रसाद कंपनी के बैनर तले करोड़ों रूपये लोगों के हजम कर लिए | हम आपको बताते चले की उस समय इन दोनों भाइयो के नाम का सिक्का चलने लगा था| लोगो से 5,50,000 (पांच लाख पचास हजार रूपये) लेकर 6 साल में 15 लाख पचास हजार देने के नाम पर करोड़ों रूपये का लालच देकर ऐठ लिए, कम्पनी के बंद हो जाने का हवाला देकर लोगों की गाड़ी मेहनत की कमाई डकार गये|
आगे बताते चले कि 1 सितम्बर 2022 हरिभूमि में खबर प्रकाशित हुई, का, हैडिंग था – “पैसे दोगुने करने तथा कार दिलाने के नाम पर 14 लाख 79 हजार की ठगी” (यह मामला जस्ट 999 कंपनी का – तीन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला 420 का)

प्रार्थी नन्दलाल पटेल ने 23 अक्टूबर 2019 को बैंक के जरिये 3 लाख, 7 लाख एवं 4 लाख 79000 हजार नगद इन्होने लिया|
हम आपको बताते चले 999 का सरगना – रूपधर पटेल अरबो रूपये लोगो से लेकर डकार गये|

वर्त्तमान में साखाराम एक सभ्य मानव की तरह जीवन जी रहे है उन्होंने गौ सेवा का मार्ग चुना है, वे श्री गोविन्द गौशाला समिति जोगीदादर के नाम पर गौशाला चलाते है|
इन सभी प्रकरणों का पूरा खुलासा पीड़ित आदिवासी फर्जी विक्रेता एवं क्रेता पटवारी, राजस्व निरिक्षण, तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी एवं कलेक्टर से साक्षात्कार बयान बाजी, सभी दस्तावेज की प्रमाणीकरण का पूरा सच हम जल्द दिखायेंगे आप के अपने ब्रेकिंग ADN न्यूज़ पर इन्तेजार करें|
आज तक किसी ने इतने बड़े फर्जीवाडे से पर्दा नहीं उठाया, हम उठाएंगे आपके सामने सच दिखायेंगे |






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