रायपुर में 54 राशन दुकानों की बंदरबांट! 3-3 लाख की घूसखोरी का आरोप, मंत्री-विधायक तक को भनक नहीं...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पीडीएस (PDS) राशन दुकानों के आवंटन में भारी गड़बड़ी और लेनदेन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि विभाग ने बेहद गुपचुप तरीके से 54 नई राशन दुकानों का आवंटन कर दिया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी आवंटन प्रक्रिया की जानकारी न तो विभागीय मंत्री को दी गई, न सेक्रेटरी को और न ही स्थानीय विधायकों को इसकी भनक लगने दी गई।
छोटी कमियां निकालकर निरस्त किए आवेदन, 'अपनों' को बांटी दुकानें -
सूत्रों की मानें तो एक राशन दुकान के एवज में 3 से 3.5 लाख रुपये तक का मोटा लेनदेन हुआ है। आरोप है कि जिन आम लोगों ने इन दुकानों के लिए आवेदन किया था, उनके फॉर्म में छोटी-छोटी तकनीकी कमियां निकालकर उन्हें जानबूझकर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर विपक्ष (कांग्रेस) समर्थित लोगों को फायदा पहुंचाते हुए पिछले दरवाजे से ये दुकानें आवंटित कर दी गईं। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चयन का पैमाना क्या था?
बिना ट्रांसपोर्टर नई दुकानों का बोझ, कैसे बंटेगा राशन ?
विभाग का यह फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि वर्तमान में राशन सप्लाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों की भारी कमी है। स्थिति यह है कि सितंबर महीने का राशन 29 तारीख तक दुकानों में नहीं पहुंच पाया था, जिसके चलते राशन वितरण की तारीख को 15 अक्टूबर तक बढ़ाना पड़ा। जब मौजूदा दुकानों में ही समय पर राशन नहीं पहुंच पा रहा है, तो बिना तैयारी 54 नई दुकानें खोलने से सप्लाई व्यवस्था और चरमरा जाएगी।
हितग्राही परेशान, दुकानदार कर रहे मनमानी -
एक तरफ आवंटन में कथित भ्रष्टाचार की बू आ रही है, तो दूसरी तरफ आम जनता मौजूदा व्यवस्था से ही त्रस्त है:
समय की अनदेखी: सुबह 8 बजे खुलने वाली राशन दुकानें सुबह 10 बजे तक बंद रहती हैं। दुकानदार अपनी मर्जी से दुकानें खोलते हैं, जिससे कामकाजी लोगों और महिलाओं को भारी परेशानी होती है।
बायोमेट्रिक का झंझट: बुजुर्गों के अंगूठे का निशान मशीन में स्पष्ट नहीं आता। ऐसे में दुकानदार वैकल्पिक व्यवस्था (मैनुअल) का इस्तेमाल करने के बजाय हितग्राहियों को कई दिनों तक दुकान के चक्कर लगवाते हैं।
विभाग में शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहती है।
सार्वजनिक हो आवंटन सूची, भाजपा नेताओं में भी नाराजगी -
इस गुपचुप आवंटन से सत्ताधारी दल (भाजपा) के कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं में भी भारी नाराजगी है। मांग उठ रही है कि पारदर्शिता के लिए विभाग तुरंत आवंटन सूची, निरस्त किए गए आवेदनों के कारण और चयनित संस्थाओं के नाम सार्वजनिक करे, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
अधिकारियों और संघ ने दी सफाई -
इस पूरे विवाद पर अधिकारियों और पीडीएस संघ ने अपना बचाव किया है:
भूपेंद्र मिश्रा (फूड कंट्रोलर, रायपुर): "लेनदेन और गड़बड़ी के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। सभी समूहों को नियमों का सख्ती से पालन करते हुए ही दुकानें आवंटित की गई हैं।"
नरेश बाफना (अध्यक्ष, पीडीएस संघ): "राशन दुकान के नाम पर 3 से साढ़े 3 लाख रुपये लेने की बात बेबुनियाद है। किसी से भी कोई पैसा नहीं लिया गया है।"






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