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महासमुंद की 14 महिलाओं ने पेश की मिसाल: 'बिहान' योजना से बदली किस्मत, मशरूम उत्पादन से बनीं लखपति...

Sep 16
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

महासमुंद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण के विजन को धरातल पर साकार करते हुए महासमुंद जिले की ग्रामीण महिलाएं अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' योजना के माध्यम से जिले की महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।



















ऐसी ही एक प्रेरक कहानी विकासखंड बसना के ग्राम पंचायत खोगसा के आश्रित ग्राम पलसाभाड़ी की है। 17 अप्रैल 2018 को यहां की 14 महिलाओं ने गरीबी को मात देने के लिए एकजुट होकर 'भवानी महिला स्व-सहायता समूह' का गठन किया। ये सभी महिलाएं गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से थीं, जो केवल गृहणी के रूप में अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां निभा रही थीं। 'बिहान' योजना की सीआरपी दीदियों के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर इन महिलाओं ने बचत, ऋण और विभागीय योजनाओं का लाभ उठाना शुरू किया।


सावित्री पटेल ने लिखी सफलता की इबारत -

समूह से जुड़ने के बाद सदस्य सावित्री पटेल ने अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से मशरूम उत्पादन करने का निर्णय लिया। उनके पास जगह तो थी, लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी आड़े आ रही थी। 'बिहान' योजना के तहत समूह को मिले आरएफ (RF), सीआईएफ (CIF) फंड और बैंक लिंकेज से प्राप्त वित्तीय सहायता ने उनके इस सपने को नई उड़ान दी। आर्थिक मदद मिलते ही सावित्री ने न सिर्फ मशरूम का उत्पादन शुरू किया, बल्कि गाय पालन और दुग्ध उत्पादन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया।

सालाना आय 85 हजार से बढ़कर 2.38 लाख हुई -

इन आजीविका गतिविधियों को अपनाने के बाद सावित्री पटेल के परिवार की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव आया है। सावित्री बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 85 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख 38 हजार रुपये वार्षिक हो गई है। ईमानदारी और लगन का आलम यह है कि वे ग्राम संगठन से प्राप्त ऋण का समय से पूर्व, ब्याज सहित भुगतान भी कर रही हैं।


आर्थिक मजबूती ने सावित्री और समूह की अन्य महिलाओं के आत्मविश्वास को काफी बढ़ाया है। आज वे आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार का बेहतर भरण-पोषण कर रही हैं और बच्चों की उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आसानी से पूरा कर पा रही हैं।

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