कद्दावर आदिवासी नेता नंदकुमार साय कांग्रेस में शामिल


स्वयं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ प्रान्त ने आत्मीय स्वागत किया

कांग्रेस खेमा सशक्त से अतिसशक्त
B.J.P. से कांग्रेस में प्रवेश
छत्तीसगढ़ कांग्रेस खेमे में चहुँ ओर स्वागत नंदकुमार साय का
B.J.P. को बड़ा झटका
आदिवासी नेता व पूर्व सांसद

1977 में पहली बार , 1989, 1996 और 2004 में जीते है लोक सभा चुनाव
2009 से 2016 तक रहे भाजपा के राज्य सभा सदस्य
मौजूदा समय में अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रिय अध्यक्ष
तीन बार लोक सभा और दो बार राज्य सभा सांसद रहे
नन्दकुमार साय ने बीजेपी अध्यक्ष को स्तीफा सौपा था
मान मनौव्वल की कोशिश और वादे धरे के धरे रह गये
पूर्व मुख्मंत्री डॉ रमनसिंह ने भी कहा था मनाने की कोशिश की जाएगी
आदिवासी समाज के मुखिया ने बीजेपी में घुटन महसूस की
कई आरोप लगाये बीजेपी नेताओं पर
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को स्तीफा सौपा

छत्तीसगढ़ मीडिया और राजनैतिक दलों की ज़ुबा से बस एक ही नाम सुनाई दे रहा है नंदकुमार साय, नंदकुमार साय तो आइये जानते है नन्द कुमार साय के बारे में
नंद कुमार साय एक जानी मानी हस्ती है ये भारतीय राजनीतिज्ञ हैं इनका जन्म मध्यप्रदेश (वर्तमान में छत्तीसगढ़) के जशपुर जिला अंतर्गत भगोरा गाँव में 1 जनवरी 1946 को हुआ था। पिता लिखन साय माता रूपानी देवी है। उनका जन्म किसान परिवार में हुआ था और उन्होंने एनईएस कॉलेज (पूर्व में रविशंकर विश्वविद्यालय) से मास्टर की डिग्री पूरी की थी
उत्तरी छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखने वाले बीजेपी के प्रमुख कद्दावर आदिवासी नेता नंदकुमार साय पहली बार 1977 में मध्य प्रदेश के तपकरा सीट (वर्तमान में जशपुर जिले में) से जनता पार्टी के विधायक चुने गए थे. वे 1980 में बीजेपी की रायगढ़ जिला इकाई प्रमुख चुने गए थे. वे 1985 में तपकरा से बीजेपी विधायक के रूप में चुने गए थे, 1989, 1996 और 2004 में रायगढ़ से लोकसभा सदस्य रहे बाद में सन 2009 और 2010 में राज्यसभा सदस्य चुने गये थे. नंद कुमार साय 2003-05 तक छत्तीसगढ़ भाजपा अध्यक्ष और 1997 से 2000 तक मध्य प्रदेश भाजपा प्रमुख रहे
दो बार के लोकसभा सांसद और तीन बार के विधायक नंदकुमार साय पूर्व में अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। नंदकुमार साय ने अपने त्यागपत्र में आरोप लगाया कि उनकी छवि धूमिल करने झूठे आरोप लगा रहे थे और उनके सहयोगी साजिश रच रहे थे। जिससे उन्हें बहुत आहत हुआ। आगे उन्होंने अपने त्यागपत्र में लिखा कि मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं. पार्टी ने मुझे जो भी जिम्मेदारियां दी हैं, मैंने उन्हें पूरी निष्ठा के साथ निभाया. मैं इसके लिए पार्टी का आभार व्यक्त करता हूं.

वर्ष के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा को लगा बहुत बड़ा झटका, भाजपा के दिग्गज वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार साय ने कांग्रेस पार्टी को अपना लिया है. गत रविवार को नंद कुमार साय ने पार्टी के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को इस्तीफा सौप दिया था. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर अपना वर्षों पुराना नाता तोड़ लिया है.






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